गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

होली फादर का सेक्स रैकेट

भूतपूर्व पादरी एंथोनी गैविंस अपनी पुस्तक 'ए मास्टरकी तो पोपरी' में एक पादरी, जो मृत्यु शैय्या पर है, के कन्फैशन का उल्लेख करते हैं जो हमें उजले लबादे के पीछे छिपे राक्षसों के जीवन की एक झलक देता है. एंथोनी गैविंस ने इस पादरी की पहचान छिपाने के लिए उसे डोन पाउलो  के नाम से संबोधित किया है. ये कन्फैशन इस प्रकार है:
मैं अपनी चर्च में १६ वर्ष के लिए पादरी रहा हूँ और इस काल में मैंने अपने क्षेत्र में बसने वाले १६०० घरों में से लगभग प्रत्येक को ही धोखा दिया है. मेरे पास कोई पैत्रिक धन अथवा समाप्ती नहीं थी किन्तु आज मेरे पास १५,००० सिक्के हैं और ६,००० सिक्के मैं दे चुका हूँ. मेरा जीवन यापन एक वर्ष में लगभग ४०० सिक्कों से हो जाता है. 
जब से मैंने कन्फैशन सुनने आरम्भ किये, मेरे विचार कभी भी स्वच्छ नहीं रहे; किन्तु मेरा व्यवहार और बात चीत, इन सब के प्रति कठोर और अनुशासित होती थी. ये सब लोग मुझ से भयभीत थे और मेरा सम्मान करते थे. मेरा इन सब पर ऐसा अधिकार था कि कुछ जो मेरे कुकर्मों को जानते थे, वो भी सार्वजनिक जीवन में मेरा पक्ष लेते थे. मेरा चर्च के प्रति जो दायित्व था, उसे मैंने केवल खाना पूर्ती के लिए ही किया है. 
मैं बहुत से अबोध लोगों की हत्या का कारण बना हूँ. मैंने साठ पुरुषों को गर्भपात करने की औषधि ला कर दी है जिस से कि वो सब अपने अजन्मी संतानों के हत्यारे हैं. (हालांकि गर्भपात एक अपराध था किन्तु होली फादर इस नीच कर्म में सम्मिलित होते रहते थे. ऐसा एक वर्णन होली फादर का ब्रह्मचर्य में भी पढ़ सकते हैं).
हमारी चर्च में हम छः प्रीस्ट हैं और गत बारह वर्षों में हमने अपनी हर प्रकार की इच्छा पूर्ती के लिए सभी संभव उपाय किये हैं. हम में से प्रत्येक के पास अपने क्षेत्र की सुन्दरतम और आकर्षक महिलाओं की एक सूची होती थी. और यदि हम में से किसी का मन किसी और के क्षेत्र की किसी ऐसी महिला पर आ जाता जो कि अत्यंत आकर्षक होती थी तो वो उस क्षेत्र के पादरी को बता देता. उस क्षेत्र का पादरी उसे अपने घर पर बुला भेजता था, जहां कि उसकी मांग करने वाला फादर पहले से उपस्थित होता था. वो वहाँ अपनी इच्छा पूर्ती कर लेता था. हम ने गत बारह वर्षों में एक दूसरे की इस प्रकार सहायता की है. 
ये सब सुचारू रूप से चलाने के लिए हम इस प्रकार चाल चलते थे; उन महिलाओं के पति अथवा पिता को हम कह देते थे कि इस महिला अथवा कन्या को किसी भी प्रकार की साम्प्रदायिक अथवा आध्यात्मिक गतिविधि से वंचित न किया जाए; महिला से हम कहते थे कि अपने पति अथवा पिता से कहे कि वो फादर की आज्ञा के अनुसार चलें; ऐसा करने से वो प्रीस्ट से मिलने के लिए बिना किसी रोक टोक के आ जा सकती थीं. यदि वे ऐसा करने से इनकार करेंगी तो या तो हम उनके पति/पिता को उन्हें कहीं भी आने जाने से मना करने के लिए कह देंगे; अथवा उन्हें होली इन्कुइसिशन को सौंप देंगे. इस चाल में फंस कर वो सदा हमारे चंगुल में फंसी रहती थीं और किसी पर ये रहस्य प्रकट भी नहीं कर सकती थीं.
मुझे अपने क्षेत्र में जितनी महिलायें आकर्षक लगी मैंने उन में से किसी एक को भी नहीं छोड़ा, और मेरे फादर भाइयों के क्षेत्र में भी जो मुझे अच्छी लगीं, मैंने उनसे अपनी इच्छा पूर्ती की. मैं इस संबंध में कोई निश्चित आंकड़ा तो नहीं बता सकता किन्तु इन महिलाओं के माध्यम से मेरी साठ संतानें जीवित हैं. मैंने अपने घर में दो महिलाओं को रखा हुआ है, जो कि दोनों बहनें हैं. वो मेरे पास अपने माता पिता के देहांत के पश्चात आयी थीं. इन में से बड़े वाली से मेरे दो लड़के हैं और छोटे वाली से एक. मेरा एक लड़का जो मेरी बहन से जन्मा था, उसकी मृत्यु हो चुकी है. इसलिए मैं अपनी बहन के लिए ५,००० सिक्के छोड़े जा रहा हूँ, ये उसे मिलेंगे यदि वो सेंट बर्नार्ड कॉन्वेंट में नन बन कर रहेगी. उन दोनों युवा बहनों के लिए मैं २,००० सिक्के प्रति व्यक्ति छोड़ रहा हूँ जो मेरे बच्चों की माँ हैं और शेष मैं अपने तीनों बच्चों के लिए छोड़े जा रहा हूँ. 
इस कन्फैशन में जो तथ्य उभर कर सामने आते हैं, वो ये हैं कि चर्च के शत प्रतिशत पादरी इस सेक्स रैकेट में संलिप्त थे. इतना ही नहीं, वो एक दूसरे को, सड़क छाप दलालों की भांति, अपने अपने क्षेत्र की सुन्दरतम महिलाएं परोस कर देते थे. ये वासना के भूखे होली फादर अपनी बहन तक को नहीं छोड़ते थे. आज पूरे भारत देश में रॉबर्ट डि नोबिली के ये वंशज कैथोलिक आश्रम खोल रहे हैं और इस खोखली विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं. समाज सेवा के नाम से हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करने पर तुले हुए हैं. एक विदेशी महिला ने इसाई मिशनरियों को इतनी शक्ति प्रदान कर दी है कि वो सर्वोच्च न्यायालय को अपनी मतान्तर पर की गयी टिपण्णी से पलटने पर बाध्य कर देते हैं.

एक नन का कन्फैशन

मैं नन बनना चाहती हूँ.
ये उत्तर दिया था मेरी एक छात्रा ने. उस दिन मैं अपने सभी विद्यार्थियों से पूछ रहा था कि उनके जीवन का लक्ष्य क्या है. ये उत्तर सुन कर मैं अवाक रह गया. अब तक मैंने निर्धनों, मूर्खों, आदिवासियों के संबंध में सुना था कि किस प्रकार मिशनरी उन्हें प्रलोभन दे कर अथवा धोखे से इसाई बना रहे थे. किन्तु चंडीगढ़ जैसे नगर में और एक सभ्रांत चार की बच्ची से मुझे इस की अपेक्षा नहीं थी. कदाचित मैंने मिशनरियों की बढती शक्ति को कम कर के आँका था. थोड़ा पूछने पर पता लगा कि वो एक मिशनरी विद्यालय में पढ़ती है, जिसे सोनिया गाँधी (Antonia Maino) के निकट माने जाने वाला इसाई दम्पति चलाता है. कुछ लड़कियों को बाइबल का पाठ भी पढ़ाया जाता है. ये छात्र अपने बसते में एक छोटी बाइबल ले कर चलती थी. इस बाइबल की विशेषता ये थी कि इस में बड़ी चतुराई से वो अंश हटा दिए गए थे जो मूर्ती पूजा के प्रति घृणा का उल्लेख करते हैं. इस बाइबल में से तो क्राइस्ट का प्रेम छलक रहा था.

जब उसे बाइबल का उचित रूप दिखाया गया तो उसे आभास हुआ कि उसे किस प्रकार मूर्ख बनाया जा रहा था. वो अभागियाँ जो मिशनरी जाल से नहीं बच पाती, क्या करती होंगी अथवा क्या नहीं कर पाती होंगी, इस सन्दर्भ में एंथोनी गैविंस की पुस्तक 'ए की तो पोपरी' में एक कन्फैशन का उल्लेख है. इस कन्फैशन से पूर्व नन के कन्फैशन की व्यवस्था को समझ लें.

इसाइयत में कन्फैशन सुनने का अधिकार केवल पुरुषों को ही है. प्रत्येक कॉन्वेंट के बगल में एक कन्फैशन करवाने वाला फादर तथा उसका एक सहयोगी फादर निवास करते हैं. सांझी दीवार में एक जालीदार झरोखे से कोई भी नन कन्फैशन कर सकती है.

बहुत से लोग अपनी बच्चियों को नन बनने के लिए जब छोड़ कर जाते हैं तो इन बच्चियों की आयु पांच से आठ वर्ष की होती है. पन्द्रहवां वर्ष एक परीक्षा का वर्ष माना जाता है, जिसमें यदि ये बच्चियां चाहें तो नन बनने का विचार त्याग कर अपने प्रियजनों के पास लौट सकती हैं. यदि वे नहीं लौटती तो उन्हें नन बना दिया जाता है, जिसके नियमों के अनुसार उन्हें आजीवन ब्रह्मचारिणी रहना होता है. कॉन्वेंट की प्रधान अध्यापिका और अन्य वरिष्ठ महिलायें प्रारम्भिक वर्षों में उन्हें कोई कठिन कार्य नहीं देती क्योंकि इस से उनके कॉन्वेंट को छोड़ कर जाने का अंदेशा होता है. और न ही उस जालीदार झरोखे के पास जाने देती है. इन बच्चियों को ऐसा प्रतीत होता है कि जीवन भर ऐसा ही सरल रहेगा.

जब वो पंद्रह वर्ष की होती हैं तो वो नन का सरल जीवन, आजीवन ब्रह्मचर्य और निर्धनता की शपथ ले लेती हैं. इस पर इन्हें विधिवत नन घोषित कर दिया जाता है. एक बार जब वो अपनी स्वीकृति दे देती हैं तो उन्हें सभी प्रकार के कार्य सौंपे जाते हैं.

सप्ताह में एक निश्चित दिन ननरी (ननों के रहने का स्थान) की सभी ननों को कन्फैशन करना होता है. ननों की अधिक संख्या होने के कारण चर्च से कई फादर कन्फैशन सुनने के लिए भेजे जाते हैं जो इन जालीदार झरोखों से कन्फैशन सुनते हैं.

जब वो पंद्रह वर्ष की होने और परीक्षा में सफल होने का पश्चात कन्फैशन करने के लिए प्रीस्टों और फादर से बात करने जाती हैं, जो ऐसे आते हैं मानों अपनी प्रेयसी से मिलने आये हों, तब इन लड़कियों को आभास होता है कि उनके साथ तो धोखा हुआ है. वो इस पर दुखी होती हैं परन्तु उनके पास इस का कोई उपाय नहीं होता. अपनी उत्तेजनाओं को तृप्त करने के लिए वो हर प्रकार के अशोभनीय कार्य करने को आतुर हो जाती हैं. 

किसी व्यक्ति विशेष से आकर्षण हो जाने पर उस से प्रति दिन कन्फैशन होने लग जाते हैं. ऐसे फादर को ये नन अपना देवोतो अथवा आत्मिक पति कह कर पुकारती हैं. अँधेरा होते ही देवोतो तो चले जाते हैं, नन अपने कक्ष में आ कर उसके लिए पत्र लिखती है. ये पत्र पति पत्नी की अंतरंगता की सीमा से भी परे होते हैं.
आइये अब देखते हैं इस नन का कन्फैशन

नन: फादर मेरे पाप इतने अधिक हैं कि उन्हें भूल जाने के भय से मैंने उन्हें लिख दिया है. आप कृपा कर के इन्हें पढ़ लें.
फादर: मैं इन्हें पढ़ तो सकता हूँ किन्तु जब तक तुम अपने मुख से नहीं बोलोगी, तब तक ये कन्फैशन नहीं माना जाएगा.
नन: जब मैं १३ वर्ष की थी तो एक युवक से मुझे प्रेम हो गया था. उसने मुझे एक पत्र लिखा जो मेरे पिता के हाथ लग गया. मेरे पिता ने उसे अपने पास बुलाया और उसे कहा कि वो सेना में भारती हो जाए और दो वर्ष तक प्रतीक्षा करे. तब तक मैं विवाह योग्य हो जाउंगी और दोनों का विवाह हो जाएगा. उस युवक ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और अगले ही दिन वो सेना में सम्मिलित हो कर कैतालोनिया चला गया. मेरे पिता ने मुझे यहाँ भेज दिया और मुख्य अध्यापिका को निर्देश दिया कि मुझे और किसी से ना मिलने दिया जाए. मेरे पिता ने ये भी बताया कि उस युवक की युद्ध में मृत्यु हो गयी है. इस समाचार के पश्चात मैं जितने पाप कर सकती थी मैंने किये हैं. मुझे नन बनने की प्रतिज्ञ किये दस माह ही हुए हैं किन्तु क्योंकि मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी, इसलिए मैं गौड के प्रति अपने को नन नहीं मानती हूँ. यही विचार बहुत सी अन्य ननों का भी है, विशेषकर मेरे जैसी दस युवा ननों का जो मेरी अन्तरंग मित्र हैं और हम परस्पर सभी बातें सांझा करते हैं. हम सब का अपना देवोतो है और प्रतिदिन हम उनसे वार्तालाप करते हैं.
फादर: अपने मित्रों के पाप छिपा कर केवल अपने पाप बताओ.
नन: मेरे और मेरी मित्रों के पाप आपस में मिले हुए हैं, इसलिए मात्र अपने पाप बतान संभव नहीं है. मैं आपको अपना सबसे बड़ा अपराध बताती हूँ. हमारी एक मित्र का देवोतो अत्यंत आकर्षक युवा फादर है. हमने परस्पर योजना बनाई और उसे २२ दिन तक अपने कक्ष में ला कर रखा. इस समय में हम बहुत कम समय के लिए झरोखे पर जाते थे. हम पर किसी को संदेह नहीं हुआ. ये मेरा सब से बड़ा अपराध है.
फादर: किन्तु तुम उसे अपने कॉन्वेंट में कैसे ले गए?
नन: हम में से एक ने अपने कक्ष की भूमि पर कालीन बिछाने के लिए मंगवाया. उस फादर ने अपने अधिकारियों से एक माह की छुट्टी ले ली थी. उसने स्वयं को कालीन में लपेट कर छिपा लिया. कुली उसे उठा कर हमारे द्वार तक ले आये और हम उसे अपने कक्ष में ले गए. 


हमें भय था कि कहीं कुली हमारा भेद न खोल दें, इसलिए हमने उनसे छुटकारा पाने के लिए कुछ गुंडों को पैसे दिए ताकि उन्हें ठिकाने लगाया जा सके.

फादर को बाहर पहुंचाने के लिए हम ने उसे एक ऐसे संदूक में बंद कर दिया जो भीतर से भी खुल सकता था. ये संदूक हमने नौकरों की सहायता से बाहर के कक्ष में पहुंचा दिया और उसे किसी कार्य के लिए वहाँ से भेज दिया. इतने में वो फादर संदूक में से निकल कर सुरक्षित निकल गया.

इसके एक माह पश्चात हमारी तीन मित्रों को जब आभास हुआ कि वे गर्भवती हैं, तो वो एक ही रात में कॉन्वेंट से चली गयीं. इस घटना की नगर में चर्चा होती रही है. मैं भी यही करने वाली हूँ क्योंकि यदि मैं यहाँ रही तो मेरा पेट इस भेद को खोल देगा. इस से होने वाले बच्चे की जान तो बच जायेगी किन्तु नियमों के अनुसार, मेरी जान एक यातनापूर्ण ढंग से ले ली जाएगी.
इतना ही नहीं, कॉन्वेंट और मेरे प्रियजनों को भी असुविधा का सामना करना पड़ेगा. दूसरी ओर यदि मैं रात को निकल जाती हूँ तो मैं दोनों जीवन बचा लूंगी और कहीं दूर जा कर रह लूंगी. 

यदि मैं यहीं रहती हूँ तो मैं एक कठिन चिकित्सा से अपना जीवन बचाने के लिए दृढ प्रतिज्ञ हूँ. इसके लिए मुझे आपकी मंत्रणा और सहायता दोनों की आवश्यकता है. 

फादर: मुझे न तो इतनी कठिन परिस्थितियों का अनुभव है और न ही ज्ञान. तुम्हें किसी अनुभवी और विरद्ध कन्फैशन सुनने वाले की आवश्यकता है जो तुम्हारी समस्या का समाधान कर सके. 
नन: फादर, मैं किसी और कन्फैशन सुनने वाले को अपनी आप बीती नहीं सुनाउंगी. आप ही बताएं कि मेरी किस प्रकार सहायता करेंगे.
फादर: मेरी अनुभवहीनता, मुझे इस में पाप का भागी नहीं बना सकती. मैं तुम्हें बता चुका हूँ कि मुझे इस की कोई जानकारी नहीं है.
नन: मैं हर प्रकार की परिस्थिति के लिए तत्पर हूँ. यदि आप ने मेरी सहायता नहीं की तो मैं चिल्ला कर कहूँगी कि तुम कन्फैशन के माध्यम से मुझे तंग करते रहे हो. तुम्हें इन्कुइसिशन के लिए जाना पड़ेगा.
फादर: धैर्य रखो, मुझे तीन दिन का समय दो. मैं मंत्रणा करके तुम्हें इस का हल बताऊंगा.

प्रत्येक कॉन्वेंट में मेरे कज़न हैं

प्रस्तुत लेख एक ३३ वर्षीया महिला की कन्फैशन का विवरण है जिसे एक भूतपूर्व फादर एंथोनी गैविंस ने अपनी पुस्तक 'ए की तो पोपरी' में किया है. ये कन्फैशन उक्त महिला ने एक जेसुइट पादरी, फादर गैसका के समक्ष किया गया था. फादर गैसका इस कन्फैशन का वर्णन करते हैं:
मुझे इस ३३ वर्षीया महिला ने अपने कन्फैशन में बताया कि सोलह वर्ष की आयु से २४ वर्ष की होने तक उसने हर प्रकार का अश्लील कुकर्म किया था. और ये सभी कुकर्म उसने केवल सम्प्रदाय के होली पुरुषों के साथ ही किये थे. प्रत्येक कॉन्वेंट में एक फ्राइयर के साथ उसके संबंध थे जिन्हें वो कज़न कह कर बुलाती थी. इतने सारे कज़न होते हुए भी वो निर्धन ही थी. वो अपने नए कज़नों के लिए अपना शरीर प्रस्तुत करती थी ताकि उन से धन प्राप्त कर सके. अर्थात वो एक वेश्या की भांति रहती थी और उसके शरीर के लिए धन देने वाले सभी पुरुष वे थे जिन्हें चर्च की ओर से अधिकार प्राप्त थे. ३२ वर्ष की आयु तक उसने ऐसा ही जीवन व्यतीत किया था.
गत वर्ष उसे ऐसे स्वप्न आने लगे कि मानों शैतान उसके साथ सम्भोग कर रहा हो. इस प्रकार के स्वप्न और उन का आभास उसे निरंतर होता रहा. उस के आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब उसे ये पता लगा कि वो गर्भवती है क्योंकि गत १४ माह से उसने किसी पुरुष से संबंध नहीं बनाया था. उसके यहाँ एक बेटे का जन्म हुआ है, जिस के संबंध में उसका कहना है कि वो शैतान की संतान है. वो इस तथ्य से इतनी उत्तेजित है कि यदि मैंने उसे शांत नहीं किया तो वो आत्महत्या कर लेगी. मैंने उसे कहा है कि मुझे एक सप्ताह का समय चाहिए और आगामी रविवार को मैं इस समस्या का समाधान कर दूंगा. मुझे इस संबंध में आप की मंत्रणा की आवश्यकता है. 

समिति के प्रधान का मानना है कि ये तो असंभव सी घटना प्रतीत होती है. संभवतः वो महिला पागल है और उसे किसी चिकित्सक के यहाँ भेज दिया जाना चाहिए. इस पर जेसुइट फादर का उत्तर था कि महिला की मानसिक स्थिति स्वस्थ प्रतीत होती है. 
एक अन्य सदस्य का मत है कि इस सब के पीछे किसी शैतानी अथवा पारलौकिक शक्ति का हाथ न हो कर कुछ और ही कारण लगता है, जिस का निरिक्षण करने के लिए जेसुइट फादर को इस महिला के घर पर जा कर जांच करनी चाहिए. सभी उपस्थित सदस्यों ने इस के लिए सहमति दे दी. परिणामतः अगले दिन जब जेसुइट फादर उस महिला के घर गया तो उसे विचित्र सी सूचना मिली.

वो महिला इतनी उत्तेजित थी कि उसने इस के संबंध में बहुत से लोगों को बता दिया था; ये सूचना इन्कुइसिशन करने वालों के यहाँ भी पहुँच गयी और उन्होंने उस महिला तथा उस की नौकरानी को पकड़ लिया. वहाँ सच्चाई बाहर आई. फादर कोंचिलोस नामक एक विक्टोरियन फादर उस महिला से प्रेम करता था किन्तु वो महिला उसे देखना भी नहीं चाहती थी. फादर ने महिला की नौकरानी के साथ मिल कर षड्यंत्र रचा. नौकरानी उस महिला के भोजन में अफीम मिला देती थी जिस से वो महिला गहन निद्रा में सो जाती थी. फादर अँधेरे में उन के घर आ कर उस महिला से सम्भोग करता था. ये क्रम छः रात तक चला. इस से रहस्य खुला कि वो बच्चा शैतान की संतान नहीं है बल्कि फादर कोंचिलोस की संतान है. 
इस घटना को अकैडमी के अभिलेख (रिकार्ड) में अंकित करने का निर्णय किया गया.
वो महिला जहां रहती थी, वहाँ आस पास के बच्चे उसके द्वार पर आ कर चिल्लाते कि यहाँ शैतान की संतान रहती है. इस से परेशान हो कर वो महिला नगर छोड़ कर देहाती क्षेत्र में रहने चली गयी. उस फादर का इन्कुइसिशन के पश्चात क्या हुआ ये मुझे पता नहीं है.
ये कन्फैशन एक बार फिर से स्पष्ट करता है कि इसाई पादरी किस प्रकार दोहरा जीवन जीते हैं.

चर्च की न्यायप्रियता


अपनी पुस्तक ए की तो पोपरी में भूतपूर्व फादर एंथोनी गैविंस बताते हैं कि जब किसी फादर को लगता था कि कोई कन्फैशन  अथवा उस से सम्बंधित विषय गंभीर हैं तो एक बीस सदसीय समिति जिसे कि मॉरल अकैडमी  कहते हैं उस की समीक्षा करती है. नाम से समझ गए होंगे कि इस समिति का कार्य था नैतिक विषयों पर चिंतन करना और निर्देश देना. ये सभी बीस सदस्य इसाई मत के शीर्ष फादर होते हैं. ऐसा ही एक कन्फैशन था लियोनोर का.
इस लेख को पढ़ने से पहले लियोनोर की कन्फैशन पढ़ें. इस संबंध में जब मॉरल अकैडमी ने चिंतन किया तो इन महान और होली उच्चाधिकारियों के निर्णय की समीक्षा भी कर लें.
जब लियोनोर का कन्फैशन मॉरल अकैडमी के समक्ष रखा गया तो विचार विमर्श के पश्चात प्रमुख छः बिंदु थे जिन पर कि इस अकैडमी ने निर्णय करना था.

प्रथम बिंदु, जिसे हल किया जाना था, ये था कि क्या लियोनोर पर किये गए अत्याचार के लिए फ्रान्सिसकी कॉन्वेंट पर कार्यवाही की जा सकती थी?
अकैडमी के प्रधान ने घटना क्रम के प्रत्येक भाग की समीक्षा करने के उपरान्त कहा कि लियोनोर ने अपने कंफैसर फादर की अवज्ञा नहीं की किन्तु यदि वो कॉन्वेंट पर कार्यवाही करने की चेष्टा करेगी तो उसकी अपनी अपकीर्ति होगी और कॉन्वेंट पर तथा कंफैसर फादर पर भी एक अत्यंत नीच अपराध का धब्बा लग जाएगा. हमें उस मार्ग का चयन करना चाहिए जिसमें कि कम से कम क्षति पहुंचे. यदि फ्रान्सिसकी समुदाय पर कार्यवाही करते हैं तो इस से लियोनोर की छवि को जो क्षति होगी वो उसके अनाथ होने से अधिक होगी इसलिए हमें इस संबंध में कुछ नहीं करना चाहिए.

कहिये, कैसा लगा आप को चर्च का न्याय? यदि आप ने कहा कि ये अन्याय है तो आप को सेक्युलर नहीं माना जाएगा. हो सकता है कि राहुल गांधी आप को हिन्दू आतंकवादी कह दें. चर्च की दृष्टि में एक सोलह वर्षीया बच्ची का बलात्कार करने वाले राक्षस के प्रति कार्यवाही करने से बच्ची को अधिक हानि होगी. ये उसी चर्च का निर्णय है जिसने ६०० वर्ष तक तो आधिकारिक रूप से और उस से कहीं अधिक लंबे समय के लिए लाखों लोगों को यातनाएं दे कर इसलिए हत्या कर दी क्योंकि वो चर्च की विचारधारा से सहमत नहीं थे.

अकैडमी के समक्ष जो दूसरा विचारणीय बिंदु था, वो था कि दो माह का वो अंतराल जब फादर लियोनोर के घर रहा था और उस का शारीरिक दुरूपयोग करता रहा था, उसमें लियोनोर अपराधी है अथवा नहीं?
जी हाँ. ये होली लोग लियोनोर के अपराध की चर्चा कर रहे हैं ना कि उस बदमाश फादर  की. इसे कहते हैं चर्च का न्याय.
इन विचारशील पुरुषों में छः का विचार था कि इस दो माह के अंतराल में लियोनोर भी दोषी थी किन्तु अन्य सदस्यों का मत था कि ऐसा नहीं है. इसलिए निर्णय यह हुआ कि लियोनोर को दोषी ना माना जाये.

तीसरा बिंदु था कि जब दूसरे फादर ने लियोनोर को इन्कुइसिशन की धमकी दे कर उस से बलात्कार किया था तो इस में लियोनोर पापी है अथवा नहीं?
अर्थात दूसरे फादर के घृणित कार्य की समीक्षा नहीं हो रही है. क्योंकि वो तो होली फादर है. इस विषय पर इस अकैडमी का निर्णय था कि उसने अपने आप को इन्कुइसिशन से बचाने के लिए इस होली फादर और उसके साथियों को अपने प्रति बलात्कार करने दिया था, इसलिए उसका ये पाप अन्य पापों से बड़ा नहीं था.

चौथा बिंदु था कि लियोनोर ने चर्च में से चैलिस  चुराया है क्या इसके लिए लियोनोर से चर्च के द्वारा प्रतिशोध के रूप में कुछ लिया जाए अथवा नहीं?
इस सन्दर्भ में अकैडमी के सदस्यों में एक मत नहीं था. कुछ का मत था कि इस में लियोनोर और फादर दोनों ही दोषी थे इसलिए दोनों को इसका भुगतान करना चाहिए. किन्तु कुछ का मत था कि इस अपराध में लियोनोर तो केवल होली फादर के निर्देशों का पालन कर रही थी इसलिए फादर ही दोषी था. निर्णय था कि लियोनोर को क्षमा कर दिया जाए. जहां तक फादर का प्रश्न है तो उनकी समाज में प्रतिष्ठा को देखते हुए और ये जानते हुए कि उनके मर्नोप्रांत सब कुछ चर्च को ही मिलने वाला है, उनसे कुछ ना लिया जाए.

पांचवा बिंदु था कि क्या चर्च में सहवास करने से चर्च अपवित्र हो गयी है? क्या लियोनोर बताने के लिए बाध्य है कि वहाँ क्या क्या किया गया था? 
जहां तक चर्च के अपवित्र हो जाने का प्रश्न था तो सर्व सम्मति ये थी कि चर्च दूषित हो गयी है. दूसरा प्रश्न था बिशप को विस्तार पूर्वक चर्च में के गयी गतिविधि के संबंध में; चार सदस्यों का मत था कि विस्तार पूर्वक बताना चाहिए जब कि अन्य सोलह सदस्यों की सहमति नहीं थी. उनका विचार था कि होली वाटर अर्थात पवित्र जल के छिडकाव से चर्च पवित्र हो जायेगी.

अंतिम बिंदु था कि क्या इस सब को अकैडमी के अभिलेख (रिकार्ड) में अंकित किया जाए अथवा नहीं?
इस सन्दर्भ में निर्णय किया गया कि इन घटनाओं और निर्णयों को पीड़िता और फादर के नाम ना लिखे ही अंकित कर लिया जाए. न ही ये उल्लेख हो कि ये इसाई मत के किस गुट के थे.

कैसा लगा चर्च का न्याय? ध्यान रहे कि ये कोई इक्का दुक्का भ्रष्ट पादरी का विषय नहीं है बल्कि शीर्ष समिति का व्यवहार है. इस सब से क्या शिक्षा मिलती है? ए होली फादर! जितना लूटना है लूटो, भले ही वो बच्चियों की मर्यादा ही क्यों न हो, तुम्हें कोई आंच नहीं आ सकती. 

प्रकृति ने हमारी रचना जिस प्रकार की है, शरीर की आयु के अनुरूप अपनी मांग होती है. इस रचना के अनुसार आजीवन ब्रह्मचर्य शाश्वत नियमों का उल्लंघन और प्रकृति की अवहेलना ही कहा जाना चाहिए. इस का परिणाम है कि जब शरीर की प्राकृतिक आवश्यकताओं की पूर्ती नहीं होती तो मानसिकता विकृत होना अवश्यम्भावी है. यदि हम इसाई मत के इन तथाकथित होली पुरुषों के व्यवहार को देखें तो समझ में आ जाता है कि एंथोनी गैविंस, जो स्वयं इस जीवन शैली के साक्षी रहे हैं, क्या कहना चाहते हैं. इसलिए जब वो लिखते हैं कि बहुत थोड़े से ही फादर उचित जीवन आदर्शों का निर्वाह करते हैं तो हमें जान लेना चाहिए कि अधिकतम फादर एक दोहरी जीवन शैली जी रहे हैं. उनका व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक जीवन एक दूसरे के विरुद्ध हैं, इसलिए ढोंग करना उनकी प्रकृति बन जाता है.

ये समस्या केवल पुरुषों की हो, ऐसा भी नहीं है. आये दिन समाचार पत्रों में जो इसाई नन्स के संबंध में देखने को मिलता है वो इसी समस्या का दूसरा परिपेक्ष है. इसकी एक झलक हमें इसी पुस्तक में मिल जाती है. यदि विश्वास नहीं है तो एक नन का कन्फैशन पढ़ लीजिये.

बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

होली प्रीस्ट द्वारा ब्लैकमेल

जो दूसरा कन्फैशन है, वो चर्च के यहाँ अंकित है और १७१० में एक महिला द्वारा एक फादर के समक्ष किया गया था. पहचान गुप्त रखने के लिए काल्पनिक नाम लियोनोर से वर्णन किया गया है.

लियोनोर: अपनी आयु के प्रथम १६ वर्षों में कोई उल्लखनीय पाप नहीं है. मैं अपना कन्फैशन इस आयु के पश्चात से आरम्भ करती हूँ, जब मैंने प्रथम पाप किया था. ये इस प्रकार था. मेरे माता पिता, हमारे पारंपरिक फादर पर, जो कि एक फ्रान्सिसकी फादर था, पूर्ण रूप से समर्पित थे. हमारे घर पर उसी का एकाधिकार था. इन दिनों मेरी माता का देहांत हो गया और एक माह पश्चात ही मेरे पिता का देहांत हो गया, जिन्होंने सारी संपत्ति हमारे फादर कंफैसर के अधिकार में रख छोड़ी थी. उसे अधिकार था कि वो अपनी इच्छानुसार संपत्ति का प्रयोग कर सकता था. एक छोटा सा भाग मेरे लिए था और उसके लिए मुझे फादर के कहे अनुसार चलना था.
मेरे पिता के देहांत के एक माह उपरान्त, ये कह कर कि वो घर की प्रत्येक वस्तु की देख रेख करना चाहता है, उसने मेरे कक्ष के निकट, जहां मेरी नौकरानी सोया करती थी, अपने सोने की व्यवस्था करवा ली. पहले दिन, भोजन के उपरान्त, उसने मुझ से कहा कि मैं उसके लिए पुत्री के समान हूँ. क्योंकि मेरे पिता ने मुझे फादर के अधीन रहने के लिए कहा है, इसलिए मेरा ये कर्त्तव्य है कि मैं फादर पर अंध विश्वास करूँ.
उसके आदेशानुसार, मैंने अपनी नौकरानी को अपने सोने की व्यवस्था, जो अब तक मेरे ही कक्ष में थी, एक दूसरे कक्ष में करने को कहा और वो उसी समय वहाँ से चली गयी. इसके लगभग एक घंटे के पश्चात फादर मेरे कक्ष में आया और चिकनी चुपड़ी बातों से और धमकियों के बल से मुझ से मेरी सबसे मूल्यवान वस्तु, मेरा भोलापन मुझ से छीन लिया. ये क्रम लगभग दो माह तक चलता रहा, जिसके पश्चात, मुझे लगता है कि जब उसका मन मुझ से उचाट हो गया तो वो सब कुछ ले कर अपने कॉवेन्ट में चला गया, जहां दास दिन पश्चात उसकी मृत्यु हो गयी.
परिणामतः, जो कुछ मेरे माता पिता छोड़ कर गए थे, मैं उस सब से वंचित हो गयी. उन्होंने मुझे कभी किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी थी और मेरी शिक्षा में भी किसी प्रकार की कमी नहीं रखी गयी थी. आप कल्पना कर सकते हैं कि इतने वैभव में रहने के पश्चात अब मेरे पास अपने नौकरों को देने के लिए भी धन नहीं बचा था और ना ही प्रतिदिन उपयोग की वस्तुओं के लिए ही मेरे पास कोई धन था.
इन परिस्थितियों से मैं इतनी विवश हो गयी थी कि मुझे जो प्रथम प्रस्ताव आया, मैंने उसे ही स्वीकार कर लिया. वो एक सैनिक था, उसकी इच्छा के अनुसार हम दो वर्ष तक एक साथ रहे जिसके पश्चात उसे अपनी रेजिमेंट के आदेशानुसार केटालोनिया जाना पड़ा. वो जाते समय मेरे लिए इतना धन छोड़ गया था कि मेरा जीवन यापन ठीक चलता रहे. किन्तु शीघ्र ही उसकी मृत्यु हो गयी.
मैंने अपने जीवन को एक नया मोड़ देने का निर्णय किया. अपनी कन्फैशन के लिए मैंने फादर को अपने जीवन सम्बंधित जानकारी दी. उन्होंने मेरा नाम पूछा और अगले दिन मेरे घर आ कर मेरी समस्या के समाधान का आश्वासन दिया. मुझे इस से प्रसन्नता हुई कि मुझे एक ऐसा नेक मार्गदर्शक मिल गया है जो मेरे जीवन को सुगम बना देगा.
अगले दिन, अपने कहे अनुसार, फादर ने घर आ कर कुछ व्याख्यान किये और मेरा हाथ पकड़ कर मेरे कक्ष में ला कर कहा कि यदि मैं सैनिक अधिकारी द्वारा दिए गए आभूषण तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुएं उसे दे दूँगी तो वो मेरे लिए एक अच्छा पुरुष ढूंढ कर देंगे जो कि मुझ से विवाह कर लेगा. मैंने ऐसा ही किया. मेरे पास जो कुछ था, उसे ले कर फादर चले गए और अगले दिन आये तो मेरे समक्ष एक नया प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि मुझे फादर की इच्छा की पूर्ती करनी होगी, ऐसा न करने पर फादर मेरी सूचना 'होली इन्कुइसिशन' को दे देंगे.
इस विकट स्थिति से बचने के लिए मैंने अगले छः माह तक कई पुरुषों के प्रति अपने को प्रस्तुत किया. अंततः, उसने मुझे छोड़ दिया. अपने जीवन यापन के लिए मैं विवाहित और अविवाहित पुरुषों के साथ संसर्ग करने लगी. अब मुझ में कन्फैशन करने का एक भय व्याप्त हो चुका था.
फादर: किन्तु ऐसा कैसे हुआ कि चर्च ने तुम्हारा नाम सार्वजनिक नहीं किया, क्योंकि एक वर्ष में कन्फैशन ना करने पर चर्च ऐसा करती है?
लियोनोर: मैं एक वृद्ध फादर के पास गयी और एक सिक्का दे कर कन्फैशन का प्रशस्ति पत्र बनवा लिया, जो उस फादर ने कोई सूचना मांगे बिना ही बना दिया. ये पत्र दिखा कर मैंने अपने क्षेत्र की चर्च के पादरी को संतुष्ट कर दिया. गत वर्ष मैं जब कन्फैशन के लिए गयी तो पादरी ने मुझे मुक्त करने से इनकार कर दिया क्योंकि मैं कई बुरे कर्म कर चुकी थी. जब मैंने उसे पांच सिक्के दिए ताकि दास मॉस की व्यवस्था हो सके तो उसने मुझे ये कहते हुए मुक्त कर दिया कि एक फादर होने के नाते उसका कर्त्तव्य है कि आत्माओं को शान्ति मिले. इस प्रकार मैं चर्च के प्रकोप से बच गयी.
फादर: तुम ने बुरे कर्म करना कब से छोड़ दिया है?
लियोनोर: लगभग छः सप्ताह से.
फादर: मैं तुम्हें अभी मुक्त नहीं कर सकता. तुम आगामी गुरुवार को आना, मैं तुम्हारे जीवन की परिस्थितियों के संबंध में मंत्रणा कर के तुम्हें मुक्त करूंगा.
लियोनोर: फादर, मुझे अभी और भी बताना है. उस फादर के कहने पर मैंने चर्च में से एक चैलिस (चांदी से बना कप) चोरी की थी. उस के टुकड़े कर के चांदी बेच कर जो धन मिला था, वो मैंने उस फादर को दिया था. उस फादर के साथ मैंने चर्च में ही कई बार दुष्कर्म भी किया था. इसके अतिरिक्त, अपने कर्मों से, विचारों से और शब्दों से मैंने अनगिनत कुश्कर्म किये हैं, विशेष रूप से एक व्यक्ति के साथ, जिस से मैंने अंतिम संबंध बनाए थे. अब मैं उस से मुक्त हो चुकी हूँ.
फादर: मुझे इन सभी विषयों पर मंत्रणा करने का समय दो. मैं इन का हल तुम्हारे आगामी कन्फैशन के समय कर दूंगा. अभी तुम शांत हो कर जायो.

इस कन्फैशन के पुनरावलोकन में हम देखते हैं कि एक इसाई फ्राइयर अपने अधिकार में आई उस बच्ची के साथ बलात्कार करता है जिसे उसके माता पिता विश्वास कर के छोड़ चुके हैं. इतना ही नहीं, वो प्रीस्ट उस बच्ची का शारीरिक शोषण करने के साथ साथ उसकी धन संपत्ति भी लूट लेता है और उसे अन्य पुरुषों की दया पर जीने को विवश कर देता है. एक सभ्रांत कन्या को वेश्या बनने पर विवश कर देता है जिसे उसके माता पिता ने कभी कमी नहीं रहने दी थी.
एक दूसरा इसाई प्रीस्ट भी उसका धन वैभव लूट लेता है और उसका शारीरिक शोषण करता है. ये होली फादर उस विवश लड़की से होली चर्च में ही संसर्ग भी करता है और होली चर्च की वस्तुएं चुरा कर, उन्हें तोड़ कर उनका धन अपने अधिकार में कर लेता है. और इस के लिए वो सहारा किस का लेता है - होली इन्कुइसिशन का.
ओह! इन होली राक्षसों के कृत्यों की आड़ में एक और होली प्रीस्ट तो रह ही गया; जिसने एक सिक्के की रिश्वत ले कर प्रशस्ति पत्र दे दिया था. और एक दूसरा होली फादर था जिसने पांच सिक्के लिए थे क्योंकि वो आत्माओं की शान्ति के प्रति सजग था.
होली फादर, होली चर्च, होली प्रीस्ट और होली इन्कुइसिशन. अंग्रेजी में होली का अर्थ पवित्र होता है. विश्वास नहीं हो रहा तो कर ही लीजिये क्योंकि अन्यथा आप सेक्युलर नहीं कहलायेंगे.
इन सब होली बातों में कहीं भूल जाऊं, एक होली फादर ने इस विवश लड़की को अपने साथियों के समक्ष भी प्रस्तुत किया था. इसे क्या कहेंगे दलाली या परंपरा के अनुसार होली दलाली. 

सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

होली फादर का ब्रह्मचार्य

जब भी समाचार पत्रों में किसी पादरी द्वारा किये गए यौन उत्पीड़न कि घटना उजागर होती है, तो उसे एक अपवाद कह कर दबा दिया जाता है और आधुनिक युग के उन्मुक्त वातावरण को भी इस का दोषी घोषित कर दिया जाता है. इस लेख में आप जानेंगे कि न तो इसाई पादरियों द्वारा यौन उत्पीड़न कोई अपवाद है और न ही इस का आधुनिकता से कोई संबंध है. इस लेख में दी गयी जानकारी एन्थोनी गैविंस नामक एक कैथोलिक पादरी द्वारा लिखी गयी पुस्तक ' ए की तो पोपरी' पर आधारित है.
 इस पुस्तक में लेखक ने अपने जीवन काल की घटनाओं का वर्णन किया है और अन्य पादरियों के आचरण की व्याख्या की है. 
ये पुस्तक उसने तत्कालीन वेल्स  की राजकुमारी को समर्पित की है और इसके लिए चर्च के सुरक्षित प्रपत्रों का उल्लेख किया है.

कौन्फैशन 

हिंदी फिल्म 'आखिरी रास्ता' में अमिताभ बच्चन ने डेविड नामक एक इसाई की भूमिका निभाई थी, जिसमें वो अपनी पत्नी की हत्या करने वाले तीन व्यक्तियों की हत्या करता है. ये हत्याएं करने से पूर्व वो एक चर्च में जा कर एक पादरी के समक्ष स्वीकार करता है कि वो तीन व्यक्तियों की हत्या करने वाला है. पादरी पुलिस को सूचना देता है किन्तु क्योंकि पादरी ने डेविड को देखा नहीं था, इसलिए वो पुलिस की अधिक सहायता नहीं कर पाता. 
ये दृश्य आप को बताने के पीछे मेरे दो उद्देश्य हैं. एक तो ये बताना कि इसाई मत में इस प्रकार की स्वीकृति को कौन्फैशन कहते हैं हालांकि ये स्वीकृति अथवा कौन्फैशन कोई चर्च के विरुद्ध कार्य करने के पश्चात की जाति है. दूसरा ये बताना कि कौन्फैशन के समय पादरियों को पीड़ित की व्यक्तिगत जानकारी नहीं लेनी होती है. किन्तु यदि हम फिल्मों को छोड़ दें तो इस लेख को पढ़ कर आप जान जायेंगे कि ऐसे आदर्श पादरी विरले ही मिलते हैं.

पादरी जब प्रश्न पूछते हैं तो वो मर्यादा का सम्मान नहीं करते, इसका एक उदाहरण मैंने पुर्तगाल के नगर लिस्बन में देखा था. एक दास वर्ष की बच्ची ने चर्च से आ कर अपनी माँ से पूछा कि डिफ्लावर का अर्थ क्या होता है, क्योंकि उस से चर्च के फादर ने पूछा था कि क्या उसे डिफ्लावर किया गया है.
 जो पाठक इस शब्द डिफ्लावर से अनभिज्ञ हैं, उनकी सूचना के लिए बता दूं कि जब कोई कन्या अपना कौमार्य खोटी है अर्थात सम्भोग कर लेती है तो उसे कहते हैं कन्या को डिफ्लावर करना. अब आप कल्पना कीजिये कि उस 'होली फादर' की मानसिकता कैसी होगी जो कि एक दास वर्षीया अबोध बच्ची से इस प्रकार के प्रश्न पूछ रहा है.



मेरी  की गाथा

एक अन्य वर्णन के लिए एंथोनी गेविन पीड़िता की पहचान को छिपाने के लिए उसका नाम मेरी रख कर बताते हुए कहते हैं कि इस महिला की कन्फैशन एक सामान्य प्रकार की कन्फैशन है.
प्रश्न: आज के कन्फैशन से पूर्व तुमने कब कन्फैशन किया था?
मेरी: दो वर्ष और दो माह पूर्व.
प्रश्न: क्या तुम्हें 'होली मदर चर्च' के निर्देशों का ज्ञान है?
उत्तर: हाँ है.
प्रश्न: बताओ क्या निर्देश हैं?
मेरी: 'होली मदर चर्च' के पांच निर्देश हैं. १. प्रत्येक रविवार तथा अन्य छुट्टी के दिन मॉस (इसाई मत का व्याख्यान) सुनना. २. प्रत्येक वर्ष में कम से कम एक बार और यदि आपात स्थिति हो तो अधिक बार कन्फैशन करना. ३. इसाई पर्व मनाना. ४. उपवास करना. ५. चर्च को धन देना.
प्रश्न: अब सातों सैक्रामेंट (इसाई मत के रीति और रस्में) बताओ?
मेरी: १. बैपतिस्म २. कन्फर्मेशन ३. कन्फैशन  ४. लॉर्ड्स सपर ५. होली ऑर्डर ६. एक्सट्रीम अन्क्षण ७. मैट्रीमोनी
प्रश्न: अब अपने उत्तर के अनुसार दूसरे निर्देश और तीसरे सैक्रामेंट पर ध्यान दो तो तुम्हें प्रत्येक वर्ष कन्फैशन करना होता है किन्तु तुम ने इतने लंबे समय तक 'होली मदर चर्च' के निर्देश का उल्लंघन किया है. ऐसा क्यों?
मेरी: मैं एक ऐसी युवती हूँ जिसने कई बुरे कार्य किये हैं, मुझे भय था कि यदि मैंने अपने प्रदेश के पादरी से इन का कन्फैशन किया तो मेरा और मेरे घराने के कई सदस्यों का नाम कुख्यात हो जाएगा.
प्रश्न: क्या तुम्हें ज्ञात है कि यदि कोई एक वर्ष तक कन्फैशन नहीं करता तो चर्च तथा उस क्षेत्र का मिनिस्टर (पादरी) ये तथ्य सभी को बताने के लिए बाध्य है?
मेरी: मुझे इस का ज्ञान है, इसलिए मैं कुछ समय के लिए बाहर चली गयी थी. वहाँ के पादरी से मैंने कह दिया था कि मैंने अपने नगर में कन्फैशन कर लिया है और अपने क्षेत्र के पादरी को मैंने कह दिया था कि मैंने गाँव में कन्फैशन कर लिया था. इस प्रकार मैं चर्च द्वारा कुख्यात होने से बच गयी.
प्रश्न: अच्छा अब ये बताओ कि आज तुम चर्च द्वारा निर्धारित समय से अतिरिक्त समय में कन्फैशन के लिए क्यों आई हो ? इस का कारण श्रद्धा है अथवा सांसारिक सुख?
मेरी: गत दो वर्ष तक मैं एक पुरुष के साथ रह रही थी जिसने मुझ से विवाह करने का वचन किया था. वो दो माह पूर्व मर गया है. इसलिए मैंने निर्णय किया है कि मैं अपना शेष जीवन पवित्रता से व्यतीत करूंगी.
प्रश्न: अभी तुम उस पुरुष की मृत्यु से दुखी हो, इसलिए संभव है कि तुम्हारा ये पश्चाताप अपने बुरे कर्मों के कारण न हो कर, दुःख के कारण हो. कहीं ऐसा न हो कि जैसे ही तुम इस दुःख से उभारो, तुम्हें लगे कि तुम ने उचित निर्णय नहीं लिया इसलिए शीघ्रता से निर्णय मत लो. इसलिए मेरी मंत्रणा है कि तुम इस संबंध में और विचार कर लो.
मेरी: फादर, मैंने अपने पापों का कन्फैशन करने का निर्णय कर लिया है. मैं इस पर दृढ संकल्प हूँ और मेरी इच्छा है कि मैं अपने सारे पाप स्वीकार करने के पश्चात, पश्चाताप कर के एक नया जीवन जी सकूं.
फादर: यदि ऐसा है तो गौड के नाम से अपना कन्फैशन दो. मैं चाहता हूँ कि तुम बिना लज्जा के अपने बुरे कर्मों और उनके परिस्थितियों का वर्णन करो ताकि तुम्हारे मन को शान्ति मिले.
मेरी: सर्वप्रथम तो मैं ये सीकार करना चाहती हूँ कि मैं डोन फ्रांसिस्को नामक व्यक्ति के साथ दो वर्ष तक अनैतिक रूप से शारीरिक संबंध बनाती रही हूँ. और इस संबंध के कारण मुझ से और कई दुष्कर्म हुए हैं.
फादर: क्या उसने तुम से विवाह करने का प्रण गंभीरता से किया था?
मेरी: हाँ, किन्तु वो अपने पिता के जीते जी ऐसा नहीं कर सका.
फादर: आरम्भ से ले कर उसकी मृत्यु तक मुझे सब बताओ कि इस काल में तुम्हारे विचार, व्यवहार और इस से सम्बंधित तुम्हारे स्वप्न कि प्रकार के थे?
मेरी: हम दोनों पड़ोसी थे और इस कारण हम एक दूसरे से जितना चाहते वार्तालाप कर सकते थे. वो एक सभ्रांत परिवार से था. इस आकर्षण ने धीरे धीरे प्रेम का रूप ले लिया और एक दिन जब हम दोनों के घरों के सदस्य बाहर गए थे तो उसने मेरे प्रति अपने प्रेम को स्वीकार कर लिया और इसके उपरान्त हम पति पत्नी की भांति रहने लगे. यहीं से मेरे जीवन में दुष्कर्मों का आरम्भ हुआ.
फादर: वो तुम से किस समय मिलता था?
मेरी: पहले वर्ष तो, हमारे घर के सदस्यों के सो जाने के पश्चात, वो प्रत्येक रात को मेरे कमरे में आता था. मेरा अनुसरण कर के मेरी नौकरानी, जिसे मैंने अपने इस सम्बब्ध में बताया था, उस पुरुष के नौकर के साथ यही करने लगी. इसलिए मुझे लगता है कि उसके इस दुष्कर्म के लिए भी मैं ही उत्तरदायी हूँ.
फादर: क्या तुम्हारे इस संबंध का किसी को पता लगा?
मेरी: अवश्य पता लग जाता यदि मैंने अपनी अमानवीय चिकित्सा न करवा ली होती.
(यहाँ चिकित्सा का अर्थ है गर्भपात, जो कि एक रसायन खाने से हो जाता है)
फादर: तुम्हें ये चिकित्सा किस प्रकार प्राप्त हो गयी जब कि इस के विरुद्ध तो कठोर नियम हैं?
मेरी: ये चिकित्सा प्राप्त करने के लिए मुझे और अधिक पाप करने पड़े थे. मेरा एक 'कज़न' (सगे भाई बहन के अतिरिक्त सभी भाई बहनों अर्थात चचेरे, मौसेरे, ममेरे भाई बहन को कज़न कहा जाता है) जो कि एक फ्राइयर (friar) है सदा मेरा बहुत सम्मान करता रहा है, एक दिन भोजन के पश्चात, मुझ से लव करने लगा और अश्लील बर्ताव करने लग गया. मैंने उस से कहा कि यदि वो मेरा एक कार्य कर देगा तो मैं उसकी इच्छा पूर्ण कर दूँगी. उसने मुझे कहा कि वो एक प्रीस्ट (इसाई संत) के वचन पर विश्वास कर सकती है. मैंने उसे अपने गर्भवती होनी की बात बताई तो वो अगले दिन मेरे लिए एक औषधि ले आया जिस से मेरी समस्या का निदान हो गया.
फ्राइयर - शब्दकोष के अनुसार फ्राइयर शब्द इसाई मत के विभिन्न गुटों में से चार गुटों (कार्मल, औगास्तिन, डोमिनिक, फ्रांसिसकन) के उन पुरुषों के लिए प्रयोग किया जाता है जिन्हें पादरी के रूप में नियुक्त किया जाता है.

मुझ पर ये उपकार करने के पश्चात मेरे इस कज़न प्रीस्ट ने मेरा भोग किया. उसके कहने पर मैंने उस के कई मित्रों को भी अपना भोग करने दिया. इतना ही नहीं उसने मेरी नौकरानी को भी अपनी वासना के लिए उपयोग किया. मेरी एक सखी को भी उसने उपयोग किया और जब वो गर्भवती हो गयी तो मैंने उसे भी वही औषधि दी जिस का उपयोग मैंने किया था. इसके अतिरिक्त, मेरा कज़न मुझ से धन की मांग करता था, जो मैंने अपने माता पिता से चुरा कर अपने कज़न को दिया.
फादर: अच्छा इन दिनों में तुम्हारा मित्र डोन फ्रांसिस्को तुम्हें मिलता था?
मेरी: दूसरे वर्ष वो मुझ से कम ही मिल पाता था क्योंकि हमें न तो घर पर और न ही बाहर मिलने का अवसर प्राप्त हो रहा था. नगर के बाहर, हम ने एक हर्मिट को धन दे कर उसकी चेपल में मिलने की अनुमति ले ली जहां हम ने ७-८ बार सहवास किया.
हर्मिट - शब्दकोष के अनुसार इसाई मत में इस शब्द का प्रयोग उनके लिए किया जाता है जो कि अपनी आत्मा को पवित्र करने के लिए एकाकी जीवन शैली अपनाते हैं. फादर, फ्राइयर और हर्मिट, कितने भले लोग हैं ये सब. है ना?
चेपल - एक ऐसा भवन जिसे इसाई मत के लोग गौड  की अराधना के लिए प्रयोग करते हैं.
अब तनिक पुनरावलोकन करते हैं. एक प्रीस्ट जो कि महिला का कज़न भी है, गर्भपात के लिए औषधि ला कर देता है. इस उपकार के लिए वो अपनी कज़न के साथ सम्भोग करता है और अपने साथियों को भी करवाता है. अपनी कज़न की नौकरानी का भी शारीरिक शोषण करता है और कज़न की सखी का भी. ये तो किसी महान पुरुष का चरित्र प्रतीत होता है.
तन के साथ साथ ये प्रीस्ट धन का भी लोभी है और अपनी कज़न को इतना विवश करता है कि उसे अपने घर में चोरी करनी पड़े. ये प्रीस्ट भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध का भी दोषी है.
एक हर्मिट भी है जो इतना दयावान है कि धन के लोभ में एक जोड़े को चर्च में सहवास करने देता है.
यदि आप एक हिन्दू हैं और तथाकथित बुद्धिजीवी हैं तो अभी भी आप सोच रहे होंगे कि ये सच नहीं हो सकता. है ना? ये दोष आपका नहीं है, आप इसाई सम्प्रदाय द्वारा स्थापित शिक्षा नीति की उपज हैं. भले ही आप के पास अपने नाम के पीछे लगाने के लिए लम्बी लम्बी डिग्रियां हों, किन्तु आप की सोच को कुंठित कर दिया है इस शिक्षा नीति ने. सत्य जानने के लिए और उसे आत्मसात करने के लिए आवश्यक है कि जो आप को मिशनरी विद्यालयों में पढ़ाया गया है, उसे त्यागने का प्रयास करें.

अरे हाँ! मैंने बताया नहीं कि मेरी की इस कन्फैशन के सन्दर्भ में एंथोनी गैविंस ने क्या उल्लेख किया था. उन की टिपण्णी है कि ये कन्फैशन एक साधारण कन्फैशन है. अर्थात इस में कुछ अनूठा नहीं है. 

चलिए आगे देखते हैं कि मेरी क्या बताती है. मेरी के अनुसार:
चोरी के संबंध में मैं जो पहले कह चुकी हूँ, उस से अधिक कुछ नहीं कहना. अपने कज़न के लोभ को शांत करने के लिए और इस भय से कि कहीं वो मेरा रहस्य उजागर न कर दे, मैंने अपने पिता के यहाँ से बहुत सी वस्तुएं चोरी कीं और अपनी मित्र को भी ऐसा ही करने को प्रेरित किया. 
फादर: क्या तुम भविष्य में भी उसी प्रकार से अपने कज़न के साथ रहोगी जैसा कि अब तक करती आई हो?
मेरी: नहीं. मेरे कज़न को दिव्य ज्ञान का शिक्षक बना कर किसी अन्य कॉन्वेंट में तीन वर्ष के लिए स्थानांतरित कर दिया गया है.

तो ये प्रीस्ट, एक अन्य कॉन्वेंट में जाएगा और वहाँ क्या पढ़ायेगा. दिव्य ज्ञान. ऐसे उच्च स्तरीय ब्रह्मचारी को तो अवश्य दिव्य ज्ञान प्राप्त होगा. 

यदि आप ये सोच रहे हैं कि उसका कज़न अधिक से अधिक उसे चरित्रहीन होने का आरोप ही लगा सकता था तो आप से विनम्र निवेदन है कि इन्कुइसिशन के संबंध में अपना ज्ञान बढ़ा लें.

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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

मज़हब नहीं सिखाता

जब आप किसी मुसलमान को भूमि पर वस्त्र बिछा कर नमाज़ अदा करते देखते हैं तो आप क्या सोचते हैं?
यदि आप हिन्दू संस्कृति में पाले बढे हैं तो आप सोचते होंगे कि वो गायत्री मन्त्र अथवा शान्ति पाठ की भांति सम्पूर्ण विश्व के सुख की प्रार्थना कर रहा है.
ये विचार आना स्वाभाविक है क्योंकि सनातन, वैदिक, आर्य अथवा हिन्दू मान्यता के अनुसार प्रार्थना ऐसी ही होनी चाहिए.

ला इलाहा इल अल्लाह - मोहम्मद रुसूलाल्लाह

इसका अर्थ है कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई और पूजा करने योग्य नहीं है और मोहम्मद, अल्लाह का संदेश वाहक (पैगम्बर) है.
सरल शब्दों में इस का अर्थ है कि राम, कृष्ण, शिव, विष्णु, ब्रह्मा, इश्वर, परमेश्वर, परमात्मा इत्यादि कहना इस्लाम के अनुसार एक अपराध है.
ऐसा करने वालों के लिए इस्लाम में और कुरान में जो शब्द है, वो है काफिर. काफिर दो प्रकार के हैं. एक हैं जिन्हें अहले किताब अथवा किताबी कहते हैं और दूसरे हैं मुशरिक.

अहले किताब अथवा किताबी वो हैं जिनके पास किताब (बाइबल अथवा तौरह) है. इस श्रेणी में आते हैं - इसाई और यहूदी.
कुरान के अनुसार इनसे नीच श्रेणी है मुशरिकों की. मुशरिक वो हैं जो मूर्ती पूजा करते हैं अथवा एक से अधिक देवी देवताओं को पूजते हैं. इस्लाम के संस्थापक मोहम्मद ने अपने जीवन काल में सैंकड़ों मुशरिकों की हत्या की अथवा करवाई और जीवन भर मुशरिकों से युद्ध किया. जिसे आज मक्का की मस्जिद काबा कहते हैं, वहाँ सन 628 तक मूर्ती पूजा होती थी और काबा में 360 मूर्तियाँ स्थापित थीं जो कि देवी देवताओं की थीं. इन मूर्तियों को, मोहम्मद ने मक्का पर कब्ज़ा करने के पश्चात अपने हाथों से तोड़ा था. कई काफिरों की महिलाओं को

1947 में पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दू २५ से ३० % थे किन्तु आज ये आंकड़ा २-३% है. इन हिन्दुओं का क्या हुआ ये तो सरकार ही बता सकती है किन्तु क्यों हुआ, उसका उत्तर है मोहम्मद और कुरान.
प्रत्येक मुसलमान की इच्छा है कि वो मोहम्मद के जीवन का अनुसरण करे, इसलिए मेहँदी लगाना, ऊंचा पायजामा पहनना, दाढ़ी रखना, सभी का अनुसरण किया जाता है.
मुग़ल शासन काल में और खिलाफत आन्दोलन के दंगों अथवा नोआखली के दंगों के समय भी हिन्दू महिलाओं के अपहरण, ज़बरन निकाह और बलात्कार मोहम्मद के जीवन के ही उदाहरणों का अनुसरण था. मोहम्मद ने भी कई काफिर कबीलों को हराने के पश्चात उनकी महिलाओं को अपने हरम में भर लिया था.
आज हमारे देश के मार्क्सवादी इतिहासकार हमें बताते हैं कि मोहम्मद एक नेक मानव था तथा उसने विधवाओं के उद्धार के लिए उन से निकाह किया था. वो ये नहीं बताते कि उनके पतियों की हत्या भी उसी ने की थी अथवा करवाई थी.
प्रत्येक मुसलमान जानता है कि मोहम्मद एक ऐतिहासिक तथ्य है इसी लिए जब मार्क्सवादी इतिहासकारों ने ये अफवाह उड़ाने की चेष्टा की कि मोहम्मद एक काल्पनिक चरित्र है तो मुसलमान ही उन पर भड़क उठे थे.
कम ही हिन्दू जानते हैं कि इसाइयत, इस्लाम और मार्क्सवाद, तीनों ही बाइबल में से निकले हैं और एक दूसरे के विरोधी हैं. किन्तु तीनों का एक मुख्य उद्देश्य है विश्व में एकमात्र बची हुई पुरानी सभ्यता अर्थात हिन्दू धर्म का नाश. इसके लिए आज ये तीनों शक्तियां मिल कर कार्य कर रही हैं.
इस लेख में कुरान की उन आयतों में से कुछ का उल्लेख किया गया है जो काफिरों से अथवा आज विश्व में फैले जिहाद नामक आतंकवाद से जुड़ी हैं. अंग्रेजी कुरान के लेखक हैं ताकिउद्दीन हिलाली और मोहम्मद मोहसिन खान. ये विश्व में सर्वाधिक प्रचलित कुरान है. इसका एक मुख्य कारण है कि इसे अरब सरकार के द्वारा हज यात्रिओं को बांटा जाता है.
 भारत में १९४७ में मुसलमान ९% थे किन्तु आज सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग १४% हैं जबकि इन में बांग्लादेश से आये हुए और आंकड़ों से बचे हुए मुसलमान मिला लें तो ये आंकड़ा लगभग २५% होगा. अर्थात हिन्दू केवल विदेशों में ही नहीं भारत में भी कम हो रहे हैं.
हिन्दुओं को सिखाया जाता है कि 'मज़हब नहीं सिखाता आपस में वैर करना', आइये देखें कि ये कितना सच है. प्रस्तुत लेख में कुरान के अंग्रेजी अनुवाद का प्रयोग किया गया है. ये अनुवाद हिलाली तथा खान द्वारा कृत है जोकि इस्लाम सम्प्रदाय के महान ज्ञाता माने जाते हैं. इस अनुवाद की प्रमानिन्कता इस तथ्य से सिद्ध होती है कि ये विश्व में सबसे अधिक प्रचलित कुरान है और साउदी अरब का शासन हज यात्रा के लिए आये मुसलामानों को भी ये कुरान बांटता है. कुरान की आयतों का एक विशाल भाग काफिरों के विरुद्ध लड़ने के लिए प्रेरित करता है. इस लेख में उन में से कुछ आयतों का उल्लेख किया जा रहा है.

[9:5] Hilali & Khan
Then when the Sacred Months (the Ist, 7th, 11th, and 12th months of the Islamic calendar) have passed, then kill the Mushrikun (see V. 2:105) wherever you find them, and capture them and besiege them, and prepare for them each and every ambush. But if they repent and perform As-Salat (Iqamat-as-Salat), and give Zakat, then leave their way free. Verily, Allah is Oft-Forgiving, Most Merciful.

जब हुरमत के (पवित्र) महीने गुज़र जाएँ तो मुशरिकों को जहां भी देखो, क़त्ल कर दो. उन्हें पकड़ो, घेरो और हर घात लगाने के स्थान पर उनकी ताक में छुप कर बैठो. अगर वो तौबा करते हैं और नमाज़ पढ़ते हैं और ज़कात देते हैं तो उन्हें जाने दो, यकीनन अल्लाह रहम करने वाला (रहीम) और माफ़ करने वाला (गफूर) है.

[9:6] Hilali & Khan
And if anyone of the Mushrikun (polytheists, idolaters, pagans, disbelievers in the Oneness of Allah) seeks your protection then grant him protection, so that he may hear the Word of Allah (the Quran), and then escort him to where he can be secure, that is because they are men who know not.

और अगर मुशरिकों में से कोई तुम से शरण मांगे तो उसे शरण दो ताकि वो अल्लाह का कलिमा (कुरान) सुन ले. इसके बाद उसे ऐसी जगह छोड़ो जहां वो सुरक्षित महसूस करे  क्योंकि ये वो लोग हैं जो सच नहीं जानते.

[2:193] Hilali & Khan
And fight them until there is no more Fitnah (disbelief and worshipping of others along with Allah) and (all and every kind of) worship is for Allah (Alone). But if they cease, let there be no transgression except against Az-Zalimun (the polytheists, and wrong-doers, etc.)

और तुम उन से लड़ते रहो जब तक कि फितना (अल्लाह के साथ और देवी देवताओं की अराधना) समाप्त न हो जाए और (केवल) अल्लाह का ही सम्प्रदाय रह जाए. और यदि वो समझ जाएँ तो ज़ालिमों (अन्य देवी देवताओं की पूजा करने वालों और बुरे कार्य करने वालों) के अतिरिक्त किसी के प्रति सीमा न लान्घो.

[8:38] Hilali & Khan
Say to those who have disbelieved, if they cease (from disbelief) their past will be forgiven. But if they return (thereto), then the examples of those (punished) before them have already preceded (as a warning).
[8:39] Hilali & Khan
And fight them until there is no more Fitnah (disbelief and polytheism: i.e. worshipping others besides Allah) and the religion (worship) will all be for Allah Alone [in the whole of the world]. But if they cease (worshipping others besides Allah), then certainly, Allah is All-Seer of what they do.

तुम काफिरों से कहो कि यदि उन्होंने कुफ्र छोड़ दिया तो उन की पुरानी भूलें क्षमा कर दी जायेंगी किन्तु यदि पुनः वही करने लगे तो उन्हें भी वही दंड मिलेगा जो पहले ऐसा करने वालों को मिला है.
ऐ मुसलामानों! तुम काफिरों से तब तक लड़ते जाओ जब तक कि कोई फितना न बचे और सम्पूर्ण विश्व में केवल अल्लाह का ही दीन रह जाए.

[4:55] Hilali & Khan
Of them were (some) who believed in him (Muhammad SAW), and of them were (some) who averted their faces from him (Muhammad SAW); and enough is Hell for burning (them).

उनमें से कुछ (मोहम्मद पर) ईमान लाये और कुछ ने अवहेलना की. उनके लिए जहन्नुम (नर्क) की पर्याप्त अग्नि है.
[9:73] Hilali & Khan
O Prophet (Muhammad SAW)! Strive hard against the disbelievers and the hypocrites, and be harsh against them, their abode is Hell, - and worst indeed is that destination.

  नबी (मोहम्मद)!(काफिरों और मुनाफिकों से जिहाद करो और उन से कठोरतापूर्ण व्यवहार करो. अंततः तो उनका स्थान नर्क में ही है; क्या बुरा स्थान है वो!

[9:111] Hilali & Khan
Verily, Allah has purchased of the believers their lives and their properties; for the price that theirs shall be the Paradise. They fight in Allah's Cause, so they kill (others) and are killed. It is a promise in truth which is binding on Him in the Taurat (Torah) and the Injeel (Gospel) and the Quran. And who is truer to his covenant than Allah? Then rejoice in the bargain which you have concluded. That is the supreme success.

निःसंदेह, अल्लाह ने मोम्मिनों  के जीवन और संपत्ति को बहिश्त  (जन्नत अथवा स्वर्ग) का मूल्य दे कर खरीद  (विक्रय कर) लिया है. इसलिए जब वो अल्लाह की राह में लड़ते हैं तो मारते भी हैं और मरते भी हैं. ये अल्लाह का ऐसा वायदा  है जो तौराह (यहूदी सम्प्रदाय की पुस्तक जिसे ताल्मुद भी कहते हैं), इंजील (बाइबल का इवैन्जिल Evangel) और कुरआन  में किया गया है. अल्लाह के अतिरिक्त अपने वायदे  को पूर्ण करने वाला कौन हो सकता है? इसलिए ये जो सौदा  तुमने किया है, उस से हर्षित हो जायो. यह सबसे बड़ी सफलता है.

[9:113] Hilali & Khan
It is not (proper) for the Prophet and those who believe to ask Allah's Forgiveness for the Mushrikun (polytheists, idolaters, pagans, disbelievers in the Oneness of Allah) even though they be of kin, after it has become clear to them that they are the dwellers of the Fire (because they died in a state of disbelief).

किसी नबी और मुसलामानों के लिए ये उचित नहीं है कि वे, मुशरिकों (एक से अधिक देवी देवताओं को पूजने वालों, मूर्ती पूजा करने वालों, अल्लाह को अकेला रब न मानने वालों) के लिए क्षमा प्रार्थना की दुआ  करें, भले ही वो अपने प्रियजन हों जब कि ये स्पष्ट हो चुका है कि वे जहन्नुम  में ही जायेंगे (क्योंकि वो बेईमान ही मर गए)

[9:123] Hilali & Khan
O you who believe! Fight those of the disbelievers who are close to you, and let them find harshness in you, and know that Allah is with those who are the Al-Muttaqun (the pious - see V. 2:2)

ऐ मुसलामानों! उन काफिरों से, जो तुम्हारे निकट हैं, ऐसे लड़ो कि वो तुम में क्रूरता का अनुभव करें और ये जान लो कि अल्लाह तो केवल मुसलामानों के साथ है.

[21:98] Hilali & Khan
Certainly! You (disbelievers) and that which you are worshipping now besides Allah, are (but) fuel for Hell! (Surely), you will enter it.
यकीनन तुम (काफिर) और वो जिस की तुम अल्लाह को छोड़ कर पूजा करते हो जहन्नुम की अग्नि के ईंधन हो इसलिए तुम उस अग्नि में ही जायोगे.

 
[32:20] Hilali & Khan
And as for those who are Fasiqun (disbelievers and disobedient to Allah), their abode will be the Fire, every time they wish to get away therefrom, they will be put back thereto, and it will be said to them: "Taste you the torment of the Fire which you used to deny."
[32:21] Hilali & Khan
And verily, We will make them taste of the near torment (i.e. the torment in the life of this world, i.e. disasters, calamities, etc.) prior to the supreme torment (in the Hereafter), in order that they may (repent and) return (i.e. accept Islam).
[32:22] Hilali & Khan
And who does more wrong than he who is reminded of the Ayat (proofs, evidences, verses, lessons, signs, revelations, etc.) of his Lord, then he turns aside therefrom? Verily, We shall exact retribution from the Mujrimun (criminals, disbelievers, polytheists, sinners, etc.).

और वो जो फ़ासिक़  (अल्लाह को न मानने वाले नास्तिक), तो आग में ही जलेंगे. वे जब भी अग्नि में से निकलने का प्रयास करेंगे, फिर से उसी में झोंक दिए जायेंगे और उन से कहा जाएगा,"अब इस अग्नि की यातना चखो जो तुम्हें लगता था कि केवल मिथ्याभाषण है.
और हम उन्हें उस अंतिम यातना से पूर्व ही इस जगत में यातना (विपत्तियाँ और प्रकोप) का स्वाद चखाएंगे कदाचित वे  (पश्चाताप कर के इस्लाम में) लौट आयें
और उन से बढ़ कर दोषी और कौन होगा जिन्हें रब की आयतें बताई जाएँ और इसके उपरान्त भी वे मुख मोड़ लें. उन मुजरिमों (अपराधियों, नास्तिकों, पापियों, मूर्ती पूजा करने वालों तथा अन्य देवी देवताओं की पूजा करने वालों) से हम प्रतिशोध अवश्य लेंगे.

गधा वो था जिसने कहा था "मज़हब नहीं सिखाता आपस में वैर रखना" अथवा वो हिन्दू हैं जो इस सोच से ग्रसित हो कर अपनी ही जड़ें काटने में लगे हैं.